उदयपुर से उठा ‘सेव द अरावली’ का स्वर, शेफ की तरबूज कार्विंग से लेकर इंफ्लुएंसर्स की मुहिम तक, रचनात्मक तरीकों से अरावली बचाने की अपील

उदयपुर से उठा ‘सेव द अरावली’ का स्वर, रचनात्मक तरीकों से संरक्षण की अपील

उदयपुर | सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अरावली पर्वतमाला को लेकर देशभर में पर्यावरणीय चिंता बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में राजस्थान के उदयपुर शहर से ‘सेव द अरावली’ अभियान ने जोर पकड़ लिया है। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक, आमजन, कलाकार और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स अरावली के संरक्षण की आवाज बुलंद कर रहे हैं।

उदयपुर में यह मुहिम रचनात्मक तरीकों के कारण विशेष चर्चा में है। शहर के निवासी और शेफ हर्षवर्धन ने तरबूज पर बारीक कार्विंग कर अरावली की पहाड़ियों की आकृति उकेरी और उस पर “सेव द अरावली, सेव द राजस्थान” का संदेश दिया। उनकी यह अनोखी कलाकृति सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावशाली रचनात्मक प्रयास बता रहे हैं।

वहीं, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर शिफा शोधने ने अपने डिजिटल संदेशों के माध्यम से अरावली के ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतमाला दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है और यह राजस्थान की जलवायु, जल स्रोतों और जैव विविधता की जीवनरेखा है। इसका संरक्षण न केवल वर्तमान, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

उदयपुर शहर में कई अन्य इंफ्लुएंसर्स भी पोस्ट, वीडियो और रील्स के जरिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इन डिजिटल अभियानों का उद्देश्य अरावली संरक्षण के लिए सामूहिक जनआवाज को मजबूत करना है। इसके साथ ही सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपकर प्रशासन का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करना शुरू कर दिया है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अरावली को होने वाला नुकसान भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट का कारण बन सकता है। उदयपुर से उठी ‘सेव द अरावली’ की यह पहल अब रचनात्मकता, जागरूकता और जनभागीदारी के साथ एक व्यापक जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है।

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