केमिकल फैक्ट्रियों के रासायनिक अपशिष्ट से भूमिगत जल और कृषि भूमि गंभीर रूप से प्रदूषित, ग्रामीणों ने जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की
उदयपुर जिले की मावली तहसील स्थित वासनी कला ग्राम पंचायत में प्रदूषण का संकट अब चरम पर पहुँच गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र की कुछ केमिकल फैक्ट्रियों द्वारा जहरीले रासायनिक द्रव्यों को अवैध रूप से बोरवेल के माध्यम से भूमिगत जल में छोड़ा जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप हजारों वर्ग मीटर क्षेत्र में जल और कृषि भूमि गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुकी है।
आज सुबह ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या को लेकर कलेक्ट्री के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कलेक्ट्रर को एक ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि फैक्ट्रियों द्वारा अपशिष्ट पदार्थों को खुले में फेंकने के बजाय सीधे जमीन के भीतर डालने का यह तरीका न केवल पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि मानव जीवन और स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत खतरनाक है।

ग्रामीणों ने बताया कि हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि गांव में पीने योग्य पानी लगभग समाप्त हो चुका है। साथ ही खेतों में उग रही फसलें भी जहरीली हो गई हैं, जिससे लोगों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो इलाके में महामारी का खतरा भी बन सकता है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही और संदिग्ध शिथिलता के कारण प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रभावी कदम उठाए और न ही उपखंड प्रशासन ने ठोस कार्रवाई की। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिकों और कुछ अधिकारियों के बीच मिलीभगत के कारण समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें:
- प्रभावित फैक्ट्रियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
- प्रदूषित जल और भूमि का तत्काल उपचार।
- ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों की स्वास्थ्य जांच।
- प्रभावित परिवारों को आर्थिक मुआवजा।
ग्रामीण प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि यह मामला केवल वासनी कला तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के गांवों के लिए भी खतरा बन सकता है।
विशेषज्ञों की राय:
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि रासायनिक अपशिष्ट का भूमिगत जल में अवैध निपटान गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा करता है। इससे न केवल जल स्रोत प्रदूषित होते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी कम हो जाती है, जिससे फसलें विषैले तत्वों से संक्रमित हो जाती हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर ग्रामीणों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
प्रशासन की भूमिका:
स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जब इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन हमेशा शिकायतों को टालता आया है और केवल समय गंवाने का प्रयास किया गया है।
निष्कर्ष:
वासनी कला ग्राम पंचायत का यह मामला केवल एक पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि मानव जीवन और सामाजिक न्याय का मुद्दा बन गया है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या सरकार और संबंधित विभाग गांव को इस प्रदूषण संकट से राहत दिला पाएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि वे न्याय के लिए अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे और जब तक दोषियों के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए जाते, आंदोलन जारी रहेगा।