रिपोर्टर- तोषिका साहू
उदयपुर। पाहेर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर अध्ययन एवं रसायन विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “सतत विकास में रसायन विज्ञान की भूमिका” का उद्घाटन 8 अक्टूबर को संपन्न हुआ। इस प्रतिष्ठित अवसर पर शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र से जुड़े विद्वान और शोधकर्ता शामिल हुए और उन्होंने सतत विकास के लिए रसायन विज्ञान के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

मुख्य अतिथि का संदेश:
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रोफेसर वी.एन.आर. पिल्लई, पूर्व चैयरमैन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली ने कहा कि रसायन विज्ञान सतत विकास की रीढ़ है। उन्होंने ऊर्जा, पर्यावरण और स्वास्थ्य में संतुलन बनाए रखने में रसायन विज्ञान की भूमिका को उजागर करते हुए कहा, “हमें प्रयोगशालाओं से बाहर निकलकर समाज तक जाना आवश्यक है। तभी हम सुरक्षित, स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की कल्पना को साकार कर सकते हैं।” प्रो. पिल्लई ने यह भी स्पष्ट किया कि रसायन विज्ञान का प्रत्येक क्षेत्र आज मानव सभ्यता के संरक्षण और उन्नयन में योगदान दे रहा है।
कुलपति की प्रमुख बातें:
पाहेर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हेमंत कोठारी ने सम्मेलन की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रसायन विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि रसायन विज्ञान सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए निर्णायक शक्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और नवीकरणीय संसाधनों के विकास में रसायन विज्ञान ने नई प्रणालियों को दिशा दी है। कुलपति ने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में और अधिक शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है, ताकि भारत 2047 तक विकसित देश बनने की दिशा में मजबूत कदम रख सके। उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से इस लक्ष्य में सक्रिय योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया।
गेस्ट ऑफ ऑनर और पुरस्कार:
सम्मेलन के गेस्ट ऑफ ऑनर प्रोफेसर आर. वी. जसरा, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, रिलायंस टेक्नोलॉजी ग्रुप, वडोदरा और प्रोफेसर, आरएमआईटी, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया ने प्रतिभागियों को नवाचार के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक सभ्यता की निरंतरता और समृद्धि में रसायन विज्ञान की भूमिका सबसे मुखर है। प्रो. जसरा को उनके उत्कृष्ठ नवाचार और शोध कार्यों के लिए प्रथम सुरेश चंद्र आमेटा अवार्ड प्रदान किया गया, जिसमें प्रमाणपत्र, मोमेंटो और ₹10,000 की राशि शामिल थी। उनका यह योगदान युवाओं को विज्ञान में नई दिशा देने की प्रेरणा बन गया।
अन्य प्रमुख विचार:
विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के चेयरमैन प्रो. दिलेन्द्र हिरन ने भी सम्मेलन में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि रसायन विज्ञान सतत विकास के लिए ऊर्जा, पर्यावरण और संसाधन संरक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को संदेश दिया कि इन नवाचारों को तेजी से अपनाकर ही हम हरित और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
वैज्ञानिक सत्र और शोध प्रदर्शन:
सम्मेलन के पहले दिन त्सुकुबा यूनिवर्सिटी, जापान के प्रोफेसर काजुहिरो मारुमोटो ने कार्बनिक, अकार्बनिक और क्वांटम स्पिन टेक्नोलॉजी पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इसके अलावा, डॉ. नीलू चौहान ने ग्रेफीन आधारित नैनो-कॉम्पोजिट्स और उनके हाइड्रोजन उत्पादन व भंडारण में उपयोग के बारे में जानकारी साझा की। इस सत्र ने उपस्थित शोधकर्ताओं को नवीनतम वैज्ञानिक प्रगति से अवगत कराया।
आयोजन संयोजन और सहभागिता:
सम्मेलन की संयोजक प्रोफेसर सीमा कोठारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी प्रो. रक्षित आमेटा और प्रो. नीतू शोरगर ने जानकारी दी कि देश-विदेश से आए 300 से अधिक प्रोफेसर और शोधार्थियों ने अपने नवाचार और शोध कार्यों को ओरल और पोस्टर प्रस्तुति के माध्यम से साझा किया। इस अवसर ने विज्ञान के क्षेत्र में सतत विकास के नवीन आयामों को उजागर किया।
निष्कर्ष:
अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन ने न केवल रसायन विज्ञान के सतत विकास में योगदान को बल दिया, बल्कि नए शोध, नवाचार और सहयोग के लिए एक उत्कृष्ट मंच भी प्रदान किया। युवा शोधकर्ताओं का जोश और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन इस सम्मेलन की सफलता का प्रमुख कारण रहा। यह आयोजन भारत में सतत विकास और वैज्ञानिक नवाचार के महत्व को वैश्विक स्तर पर उजागर करने में एक मील का पत्थर साबित हुआ।