उदयपुर जिला परिषद की बड़ी पहल, ई-वेस्ट कलेक्शन ड्राइव का आगाज़: घर-घर से होगा पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान का संग्रहण !

उदयपुर। उदयपुर को ग्रीन और क्लीन शहर बनाने की दिशा में जिला परिषद ने एक अनोखी और बेहद महत्वपूर्ण पहल की है। स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत जिले में ई-वेस्ट कलेक्शन ड्राइव की शुरुआत कर दी गई है। जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिया डाबी ने सोमवार को इस विशेष अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने ई-वेस्ट संग्रहण वाहन को हरी झंडी दिखाकर इस जागरूकता मुहिम को आगे बढ़ाया।

31 अक्टूबर तक चलेगी ड्राइव

जिला परिषद की इस ड्राइव का संचालन आईजीआरएफ संस्था के सहयोग से 31 अक्टूबर तक जिले के पाँच ब्लॉकों में किया जाएगा। इस दौरान विशेष टीम घर-घर जाकर लोगों से उनके घरों में पड़े पुराने और बेकार इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एकत्र करेगी। इसमें मोबाइल, चार्जर, कंप्यूटर, टीवी, फ्रीज, पंखे, प्रिंटर और अन्य छोटे-बड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान शामिल होंगे।

ई-वेस्ट क्यों है खतरनाक?

जिला परिषद के अधिकारियों का कहना है कि ई-वेस्ट सामान्य कचरे से कहीं ज्यादा खतरनाक होता है। इसमें मौजूद सीसा, पारा, कैडमियम और अन्य जहरीले तत्व सीधे तौर पर जमीन, पानी और वायु को प्रदूषित करते हैं। यह न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि लंबे समय तक मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डालते हैं। कैंसर जैसी बीमारियों से लेकर नसों और सांस संबंधी दिक्कतों तक कई समस्याओं की जड़ यही ई-वेस्ट है। ऐसे में इसका वैज्ञानिक निस्तारण बेहद ज़रूरी है।

नागरिकों में जागरूकता भी जरूरी

अभियान के दौरान केवल संग्रहण ही नहीं बल्कि लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि पुराने और अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक सामान को लापरवाही से कचरे में फेंकने से पर्यावरण पर कितना बुरा असर पड़ता है। साथ ही यह भी समझाया जाएगा कि यदि इन्हें सही प्रक्रिया से निस्तारित किया जाए तो प्रदूषण को रोका जा सकता है और रिसाइक्लिंग के जरिए इनसे फिर से उपयोगी सामग्री बनाई जा सकती है।

जिला परिषद की दूरदृष्टि

जिला परिषद सीईओ रिया डाबी का कहना है कि यह पहल उदयपुर जिले को स्वच्छ और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अग्रसर करने का एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा – “हर नागरिक यदि इस अभियान में अपनी भागीदारी निभाता है, तो हम उदयपुर को न केवल स्वच्छ बल्कि ग्रीन और क्लीन शहर भी बना सकते हैं। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी है।”

वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण

एकत्र किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए अधिकृत रीसाइक्लिंग एजेंसियों की मदद ली जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह है कि किसी भी प्रकार का प्रदूषण न फैले और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से निकलने वाली हानिकारक गैसों और रसायनों को नियंत्रित किया जा सके।

स्वच्छता ही सेवा से जुड़ा अभियान

गौरतलब है कि जिला परिषद ने इस ड्राइव को सीधे स्वच्छता ही सेवा अभियान से जोड़ा है। इसका मकसद लोगों तक यह संदेश पहुँचाना है कि स्वच्छता केवल कचरा साफ करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ई-वेस्ट प्रबंधन भी इसमें अहम भूमिका निभाता है।

उम्मीदों की नई किरण

उदयपुर जिला परिषद की इस पहल को पूरे जिले में उत्साह और सराहना के साथ देखा जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह अभियान सफल रहा और लोगों ने ई-वेस्ट को अलग करने की आदत डाल ली, तो उदयपुर देश के उन चुनिंदा जिलों में शामिल हो सकता है जो ई-वेस्ट प्रबंधन में मिसाल बनेंगे।

👉 इस तरह जिला परिषद की यह पहल न केवल स्वच्छता अभियान को गति देगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी। यदि नागरिक इसमें सक्रिय रूप से सहयोग करते हैं, तो उदयपुर को ग्रीन और क्लीन शहर बनाने का सपना जल्द ही हकीकत बन सकता है।

आपके लिए हालिया खबरें